छात्र-विर्य, ब्रह्मतेज, मूर्तिमान स्वामी विवेकानन्द आये हैं आज...
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Wednesday, April 26, 2006

गीता स्लोकार्थ (आभारित विवेकानन्द साहित्य)

जो लोग जिस प्रकार मेरी शरण लेते हैं, मैं उन्हे उसी प्रकार भजता हूँ अर्थात उन पर उसी प्रकार अनुग्रह करता हूँ, क्योंकि सभी मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं। ( गीता ४/११)
( वि.स. १ /४)

2 Comments:

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